शंकर सोनाने Dr Shankar Sonane

a A Introduction

Dr Shankar Sonane

Date of birth : 19 April 1952

Mobile No.09424401361

 जन्म 19 अप्रैल 1952 नेपानगर मप्र शिक्षा एचएससी,आयुर्वेदरत्न,एमआईएच होम्यो,पटकथालेखन प्रकाशन 1.वेदना.प्रबंधा काव्य 2.कोरी किताब.काव्य संकलन 3.संवेदना के स्वर.काव्य संकलन 4.बौराया मन. काव्य संकलन 5.मेरे तो गिरधर गोपाल.कृष्णकाव्य संकलन 6.दो शब्दों के बीच.कविता संकलन 7.किशोरीलाल की आत्महत्या.दलित काव्य संकलन 8.निर्वासिता.कविता एक औरत कविता संकलन 9.धूप में चाँदनी..ग़ज़ल संग्रह 10.गौरी..उपन्यास 11.क्रोध..बाल कहानियाँ 12.कुदरत का न्याय ..बाल कहानियाँ 13.आदिवासी मिथक कथाएं..प्रेस में 14.केक्टस के फूल..उपन्यास..प्रेस में
Published in: on October 24, 2007 at 3:04 am Comments (0)

गुरूवाणी’

aएक साहित्यकार महज़ इतना भर नहीं होता कि वह समाज और आसपास तक ही देखता हो बल्कि वह बाह्य जगत के अलावा आन्तरिक जगत के भीतर  भी झाँकने की कोशिश करता है। भौतिक जगत के अलावा भी एक ऐसा विश्व है जिसे केवल अन्तःचक्षुओं से ही देखा जा सकता है।’गुरूवाणी’एक ऐसी ही कृति है जिसमें गुरूजी के उन सभी प्रवचनों को शामिल किया गया है जो बाहर से यानी भौतिक जगत से आन्तरिक जगत तक ले जाकर आत्मा को सर्वोच्च शिखर पर प्रतिष्ठित करता है। पुस्तक का कलेवर हृदयंगम करना इतना आसान है कि कम पढ़ा व्यक्ति भी अपने एवं अपने आसपास के लोगों को समझा सकता है और बाह्य से भीतर की ओर जाकर कल्याण की ओर प्रकाश की ओर और अमृतत्व की ओर बढ़ता है।

Published in: on October 23, 2007 at 6:38 am Comments (0)

‘वीरभद्र चालीसा’

a‘वीरभद्र चालीसा’कृष्णशंकर सोनाने व्दारा रचित है। चालीसा में भगवान शंकर के प्रमुख गणों में शामिल श्रीवीरभद्र भगवान का गुणगान किया गया है। चालीसा में संकट मोचन वीरभद्र चतुष्पद,वीरभद्र बाण शामिल किया गया है। परमप्रभु श्रीकृष्ण के उपासक डा कृष्णशंकर सोनाने को श्रीकृष्ण की अप्रतीम कृपा तथा आदेश से वीरभद्र चालीसा रचने का आदेश प्राप्त हुआ था जिन्ह डा सोनाने ने सहर्ष स्वीकार कर तन्मयता से पूरा कर समाज के समक्ष एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। डा कृष्णशंकर सोनाने वैसे तो वीरशैव लिगायत और वीरगोपाल समाज से सम्बद्ध है किन्तु बाल्यावस्था से श्रीकृष्ण अनुगामी रहे हैं और आज भी है। नेपानगर,जिला बुरहारपुर मध्यप्रदेश,भारत में वीरभद्र भगवान का एक विशाल दर्शनीय मन्दिर है। डा सोनाने अपने धर्म और समाज के प्रति प्रतिबद्ध रचनाकार है।

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वीरभद्र आरती

a‘वीरभद्र चालीसा’कृष्णशंकर सोनाने व्दारा रचित है। चालीसा में भगवान शंकर के प्रमुख गणों में शामिल श्रीवीरभद्र भगवान का गुणगान किया गया है। चालीसा में संकट मोचन वीरभद्र चतुष्पद,वीरभद्र बाण शामिल किया गया है। वीरभद्र चालीसा के साथ डा कृष्णशंकर सोनाने व्दारा वीरभद्र की आरती,वीरभद्र जयकारा और वीरभद्र कीर्तन की भी रचना की गई है।हालांकि वीरभद्र आरती का रचनाकाल,वीरभद्र चालीसा के रचनाकाल के दो वर्ष का है। वीरभद्र चालीसा का रचनाकाल जनवरी.फरवरी 2005 है।

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‘मेरे तो गिरधर गोपाल

aश्रीकृष्ण के प्रति मोहित डा कृष्णशंकर सोनाने बाल्यकाल से ही रहे हैं।उम्र के उत्तरार्ध तक उनका श्रीकृष्ण प्रेम बरकरार है। इसलिए तो उन्होने अपने नाम के पहले कृष्ण लगाकर उनके प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित किया है। बाल्यावस्था का श्रीकृष्ण प्रेम तक अधिक उमड़ आया जब उन्होने संगीता साहबजी को देखा। उन्हे लगा जब संगीता साहबजी इतनी अधिक  सुन्दर है तो  निश्चित ही श्रीकृष्ण इनसे भी अधिक सुन्दर होगे ही।बस,फिर श्रीकृष्ण के प्रति हृदय में विराजमान प्रेम का आधार संगीता साहबजी को देख देख भौतिक से अधिभौतिक प्रेम को साकार कर लिया।भौतिक संगीता साहबजी से अधिभौतिक संगीतासाहबजी तक का सफर श्रीकृष्ण प्रेम में आकर स्थापित हो गया । यह प्रेम भौतिक नहीं अपितु अधिभौतिक है इसलिए तो श्रीकृष्ण की प्रतिमा संगीताजी मे पाकर दिव्य प्रेम में डुबकी लगाते हुए डा कृष्णशंकर सोनाने पाये जाते है। ‘मेरे तो गिरधर गोपाल ‘ उसी प्रेम का प्रसाद है। उन्होंने श्रीकृष्ण और संगीता साहबजी को एक ही दृष्टिकोण से देखा है और देख रहे है। ‘मेरे तो गिरधर गोपाल ‘श्रीकृष्ण प्रेम की कृति के रूप में मानी जाएगी।

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‘बौराया मन

aडा कृष्णशंकर सोनाने व्दारा रचित कविताओं का संग्रह ‘ बौराया मन ‘। डा सोनाने विशेषतः प्रेम के कवि है।मानवीय और सामाजिक संवेदनाओं और सरोकारों का अनूठा संगम ‘बौराया मन ‘ में देखने को मिलेगा।’बौराया मन ‘ को पढ़कर प्रसिद्ध साहित्यकार श्री अक्षय कुमार जैन ने कहा,डा सोनाने वस्तुतः प्रेम के कवि है,उनकी लेखनी में मानवीय संवेदनाओं की भरमार है।ऐसा लगता है,सारा विश्व उनमें समाया हुआ है।

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‘संवेदनाओं के स्वर

aडा कृष्णशंकर सोनाने व्दारा रचित कविताओं का संग्रह ‘ बौराया मन ‘। डा सोनाने विशेषतः प्रेम के कवि है।मानवीय और सामाजिक संवेदनाओं और सरोकारों का अनूठा संगम ‘बौराया मन ‘ में देखने को मिलेगा।’बौराया मन ‘ को पढ़कर प्रसिद्ध साहित्यकार श्री अक्षय कुमार जैन ने कहा,डा सोनाने वस्तुतः प्रेम के कवि है,उनकी लेखनी में मानवीय संवेदनाओं की भरमार है।ऐसा लगता है,सारा विश्व उनमें समाया हुआ है। ‘बौराया मन ‘ की तरह डा कृष्णशंकर सोनाने ने ‘संवेदनाओं के स्वर ‘ कविता संग्रह में भी अपना सारा प्रेम विश्व पर उढे़ल दिया है। उक्त दोनों कृतियाँ न केवल पठनीय है बल्कि संग्रहणीय है। प्रेम क्या होता है,यदि आपको जानना है तो डा कृष्णशंकर सोनाने की कविताओं में देखने को मिलेगा।

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डा कृष्णशंकर सोनाने व्दारा लिखा गया उपन्यास ‘ गौरी ‘

aडा कृष्णशंकर सोनाने व्दारा लिखा गया उपन्यास ‘ गौरी ‘यह उपन्यास उनके व्दारा सन् 1985 में लिखा गया है किन्तु इस उपन्यास का प्रकाशन बीस वर्ष बाद 2007 में संभव हो पाया। ‘गौरी’उपन्यास नारी उत्पीड़न तथा शौर्य की अद्भुत दास्तान है। ग्रामीण परिवेश में भी नारी किस तरह अपने अधिकार के लिए लड़की है।असामाजिकता के बीच जीवित रहते हुए ठीक उसी तरह अपने कर्तव्य का पालन करती है जिस तरह पिता का आज्ञाकारी पुत्र करता है।पुत्र भले ही माता पिता के प्रति विमुख हो जाता है लेकिन ममतामयी बेटी कभी भी विमुख नहीं हुई है।  इतिहास गवाह है बेटियाँ अपने माता पिता ही नहीं बल्कि अपने परिवार के प्रति अधिकतर उत्तरदायित्व निभाते हुए पाई जाती है। गौरी भी एक ऐसा ही चरित्र है। उपन्यास पठनीय होने के साथ साथ संग्रहीणीय भी है।

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कुदरत का न्याय

aबड़ों के लिए लिखना जितना आसान होता है उससे कहीं अधिक कठीन होता है बच्चों के लिए लिखना ।डा कृष्णशंकर सोनाने ने बच्चों की ओर भी ध्यान दिया और उन्होंने बच्चों के लिए  शिक्षाप्रद कहालियाँ लिखी । यह कहानियाँ न केवल बच्चों को शिक्षा देती है बल्कि बड़ों का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित करती है।

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क्रोध

aबड़ों के लिए लिखना जितना आसान होता है उससे कहीं अधिक कठीन होता है बच्चों के लिए लिखना ।डा कृष्णशंकर सोनाने ने बच्चों की ओर भी ध्यान दिया और उन्होंने बच्चों के लिए  शिक्षाप्रद कहालियाँ लिखी । यह कहानियाँ न केवल बच्चों को शिक्षा देती है बल्कि बड़ों का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित करती है।

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