डा कृष्णशंकर सोनाने व्दारा लिखा गया उपन्यास ‘ गौरी ‘
डा कृष्णशंकर सोनाने व्दारा लिखा गया उपन्यास ‘ गौरी ‘यह उपन्यास उनके व्दारा सन् 1985 में लिखा गया है किन्तु इस उपन्यास का प्रकाशन बीस वर्ष बाद 2007 में संभव हो पाया। ‘गौरी’उपन्यास नारी उत्पीड़न तथा शौर्य की अद्भुत दास्तान है। ग्रामीण परिवेश में भी नारी किस तरह अपने अधिकार के लिए लड़की है।असामाजिकता के बीच जीवित रहते हुए ठीक उसी तरह अपने कर्तव्य का पालन करती है जिस तरह पिता का आज्ञाकारी पुत्र करता है।पुत्र भले ही माता पिता के प्रति विमुख हो जाता है लेकिन ममतामयी बेटी कभी भी विमुख नहीं हुई है। इतिहास गवाह है बेटियाँ अपने माता पिता ही नहीं बल्कि अपने परिवार के प्रति अधिकतर उत्तरदायित्व निभाते हुए पाई जाती है। गौरी भी एक ऐसा ही चरित्र है। उपन्यास पठनीय होने के साथ साथ संग्रहीणीय भी है।
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