poem-भेड़िए कभी छिपते नहीं

भेड़िए कभी छिपते नहीं

दोस्त बनकर

दुश्मन जब

आपस में मिलना शुरू कर दे

करें मि़त्रों की तरह व्यवहार

लगे रिश्तों मे अपनापन।

दोस्त बनकर

जब दुश्मन

जागरूक हो जाए

पेश आए सावधानी से

मागने लगे दुहाईयां

लगे मिमियाने भेड़ों की तरह।

दोस्त बनकर

जब दुश्मन

उतारने लगे बलैया

तारीफों के लगे बांधने पुल

करने लगे मित्रों की बुराइया।

दोस्त बनकर

दुश्मन जब

वर्जनाएं लगे तोड़ने

पहनने लगे जामा सभ्यता का

धतियाने लगे परम्पराएं

लगे बिचकाने मुंह

दिखाकर अपनापन ।

दोस्त बनकर

जब दुश्मन

चढ़ाने लगे मनौतियां

पहनाने लगे माला फूलों की

लगाने लगे मरहम घावों पर

बगल में छिपाए हुए कटारी से

छिलने लगे तलवें

लगे खोजने अर्थ मतलब के।

दोस्त बनकर

दुश्मन जब

मिलने लगे आपस में गलें

साम्प्रदायिकों सी चले चालें

सभ्यता का दुशाला ओढ़े हुए ।

आज हमारे बीच से ही

कुछ दुश्मन कर रहे होंगे

एक दूसरे के खिलाफ

एक दूसरे के लिए

घिनौना संघर्ष…

दोस्त बनकर

अपनत्व दिखाएं

शेर की खाल में

भेड़िए छिपते नहीं ।

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Once wolves not hide /
Become friends /
When the enemy /
Each other to get started /
To behave like a friend /
Began their relationship in the water. /
Become friends /
When the enemy /
To be aware /
Presenting the carefully /
Ask him oath /
Began. Sheep in the way/.
Become friends /
When the enemy /
Arti began landing /
Nuapada of the bridge began tying /
The friends began to evil /
Become friends /
When the enemy /
Began to break taboo/
Jama began wearing a civilisation /
Began to remove traditions /
Mouth began to jeer /
Apnapan showing. /
Become friends /
When the enemy /
Offerings began Mannat /
Garland of flowers began Mala /
Began to put balm on the wounds /
Next to hide from the rapier /
Began to whittle sole /
Began to find the meaning of meaning. /
Become friends /
When the enemy /
Began to meet each other in the neck /
Walk like a communal tactics /
The shawl wrapped civilization. /
Today, only between us /
Some of the enemy will be doing /
Against each other /
With each other, /
Abhorrent struggle ./..
Become friends /
Its water. Show /
Tiger skin in /
Wolf hide./

Published in: on July 13, 2008 at 10:39 am Comments (0)

जब मैं प्रेम करती हूँ

जब मैं प्रेम करती हूँ


सारी दुनिया अपनी सी लगती है
सब कुछ समर्पित करने लगती हूँ
भरने लगती हूँ
पेड़,पौधों तितलियों और इन्द्रधनुष में रंग
फूलों में भरती हूँ सुगन्ध
जलने लगते है आँखों के चिराग
कर देती हूँ सारे माहौल को खुशहाल।।
जब मैं प्रेम करती हूँ
सितारों में भर देती हूँ रोशनी
चाँद निखर जाता है मुझे देख
निखर जाती है शरद की रात
भरती हूँ झरने में संगीत
होने लगता है प्राणों में संचार
दुनिया हो जाती है रंगीन।।
जब मैं प्रेम करती हूँ
लगता है जीवन खिलने
गूँज उठती है कृष्ण की बांसुरी
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में।।

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When I’m the love


When I’m the love
Their sound is the whole world
Everything seems am dedicated to
I seem to fill
Trees, butterflies and plants rainbow of colors
I join in the fragrance of flowers
The eyes begin to burn the lamp
I am happy to give all the atmosphere ..
When I’m the love
I filled them in the light of the stars
I see the moon is sparkles
Autumn is the night sparkles
I join in the spring of music
Up communication in life
The world is colored ..
When I’m the love
Life seems to bloom
Krishna is the echo of the flute up
In the whole universe ..

Published in: on May 7, 2008 at 2:38 pm Comments (0)

समाज का आइना होता लेखक

picture-047.jpgना भारत सिटी मिरॉर दिनांक 28 मार्च 2008 में प्रकाशित ।

Published in: on March 28, 2008 at 9:15 am Comments (0)

पुस्तको का लोकार्पण

लोकार्पणदिनांकः 04 नवम्बर,2007 रविवार को पत्रकार भवन,मालवीय नगर,भोपाल में मध्यप्रदेश तुलसी साहित्य व्दारा आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्र में डा शंकर सोनाने की बाल कहानियों की दो पुस्तकें क्रमशः 1.क्रोध ,तथा 2.कुदरत का न्याय, का लोकार्पण स्वतंत्रता सेनानी तथा साहित्यकार डा राधेश्याम योगी तथा प्रसिद्ध साहित्यकार आचार्य भगवत दुबे ने किया ।चित्र में डा राधेश्याम योगी,भगवे परिधान में ,आचार्य भगवत दुबे,डा शंकर सोनाने,डा मोहन तिवरी आनन्द तथा प्रदीप मणि धु्व्र।

There are two books of Dr Shankar Sonane’s ”KROUDH” and ”KUDRAT KA NYAY”has been LOKARPAN to readers at Bhoapl on dated 04 November,2007 in a program of Madhya Pradesh tulsi sahitya Akedami ,Pressreporter Holl,Malviya Nagar Bhopal.

Published in: on November 4, 2007 at 4:52 pm Comments (0)

शंकर सोनाने Dr Shankar Sonane

a A Introduction

Dr Shankar Sonane

Date of birth : 19 April 1952

Mobile No.09424401361

 जन्म 19 अप्रैल 1952 नेपानगर मप्र शिक्षा एचएससी,आयुर्वेदरत्न,एमआईएच होम्यो,पटकथालेखन प्रकाशन 1.वेदना.प्रबंधा काव्य 2.कोरी किताब.काव्य संकलन 3.संवेदना के स्वर.काव्य संकलन 4.बौराया मन. काव्य संकलन 5.मेरे तो गिरधर गोपाल.कृष्णकाव्य संकलन 6.दो शब्दों के बीच.कविता संकलन 7.किशोरीलाल की आत्महत्या.दलित काव्य संकलन 8.निर्वासिता.कविता एक औरत कविता संकलन 9.धूप में चाँदनी..ग़ज़ल संग्रह 10.गौरी..उपन्यास 11.क्रोध..बाल कहानियाँ 12.कुदरत का न्याय ..बाल कहानियाँ 13.आदिवासी मिथक कथाएं..प्रेस में 14.केक्टस के फूल..उपन्यास..प्रेस में
Published in: on October 24, 2007 at 3:04 am Comments (0)

गुरूवाणी’

aएक साहित्यकार महज़ इतना भर नहीं होता कि वह समाज और आसपास तक ही देखता हो बल्कि वह बाह्य जगत के अलावा आन्तरिक जगत के भीतर  भी झाँकने की कोशिश करता है। भौतिक जगत के अलावा भी एक ऐसा विश्व है जिसे केवल अन्तःचक्षुओं से ही देखा जा सकता है।’गुरूवाणी’एक ऐसी ही कृति है जिसमें गुरूजी के उन सभी प्रवचनों को शामिल किया गया है जो बाहर से यानी भौतिक जगत से आन्तरिक जगत तक ले जाकर आत्मा को सर्वोच्च शिखर पर प्रतिष्ठित करता है। पुस्तक का कलेवर हृदयंगम करना इतना आसान है कि कम पढ़ा व्यक्ति भी अपने एवं अपने आसपास के लोगों को समझा सकता है और बाह्य से भीतर की ओर जाकर कल्याण की ओर प्रकाश की ओर और अमृतत्व की ओर बढ़ता है।

Published in: on October 23, 2007 at 6:38 am Comments (0)

‘वीरभद्र चालीसा’

a‘वीरभद्र चालीसा’कृष्णशंकर सोनाने व्दारा रचित है। चालीसा में भगवान शंकर के प्रमुख गणों में शामिल श्रीवीरभद्र भगवान का गुणगान किया गया है। चालीसा में संकट मोचन वीरभद्र चतुष्पद,वीरभद्र बाण शामिल किया गया है। परमप्रभु श्रीकृष्ण के उपासक डा कृष्णशंकर सोनाने को श्रीकृष्ण की अप्रतीम कृपा तथा आदेश से वीरभद्र चालीसा रचने का आदेश प्राप्त हुआ था जिन्ह डा सोनाने ने सहर्ष स्वीकार कर तन्मयता से पूरा कर समाज के समक्ष एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। डा कृष्णशंकर सोनाने वैसे तो वीरशैव लिगायत और वीरगोपाल समाज से सम्बद्ध है किन्तु बाल्यावस्था से श्रीकृष्ण अनुगामी रहे हैं और आज भी है। नेपानगर,जिला बुरहारपुर मध्यप्रदेश,भारत में वीरभद्र भगवान का एक विशाल दर्शनीय मन्दिर है। डा सोनाने अपने धर्म और समाज के प्रति प्रतिबद्ध रचनाकार है।

Published in: on at 6:38 am Comments (0)

वीरभद्र आरती

a‘वीरभद्र चालीसा’कृष्णशंकर सोनाने व्दारा रचित है। चालीसा में भगवान शंकर के प्रमुख गणों में शामिल श्रीवीरभद्र भगवान का गुणगान किया गया है। चालीसा में संकट मोचन वीरभद्र चतुष्पद,वीरभद्र बाण शामिल किया गया है। वीरभद्र चालीसा के साथ डा कृष्णशंकर सोनाने व्दारा वीरभद्र की आरती,वीरभद्र जयकारा और वीरभद्र कीर्तन की भी रचना की गई है।हालांकि वीरभद्र आरती का रचनाकाल,वीरभद्र चालीसा के रचनाकाल के दो वर्ष का है। वीरभद्र चालीसा का रचनाकाल जनवरी.फरवरी 2005 है।

Published in: on at 6:37 am Comments (0)

‘मेरे तो गिरधर गोपाल

aश्रीकृष्ण के प्रति मोहित डा कृष्णशंकर सोनाने बाल्यकाल से ही रहे हैं।उम्र के उत्तरार्ध तक उनका श्रीकृष्ण प्रेम बरकरार है। इसलिए तो उन्होने अपने नाम के पहले कृष्ण लगाकर उनके प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित किया है। बाल्यावस्था का श्रीकृष्ण प्रेम तक अधिक उमड़ आया जब उन्होने संगीता साहबजी को देखा। उन्हे लगा जब संगीता साहबजी इतनी अधिक  सुन्दर है तो  निश्चित ही श्रीकृष्ण इनसे भी अधिक सुन्दर होगे ही।बस,फिर श्रीकृष्ण के प्रति हृदय में विराजमान प्रेम का आधार संगीता साहबजी को देख देख भौतिक से अधिभौतिक प्रेम को साकार कर लिया।भौतिक संगीता साहबजी से अधिभौतिक संगीतासाहबजी तक का सफर श्रीकृष्ण प्रेम में आकर स्थापित हो गया । यह प्रेम भौतिक नहीं अपितु अधिभौतिक है इसलिए तो श्रीकृष्ण की प्रतिमा संगीताजी मे पाकर दिव्य प्रेम में डुबकी लगाते हुए डा कृष्णशंकर सोनाने पाये जाते है। ‘मेरे तो गिरधर गोपाल ‘ उसी प्रेम का प्रसाद है। उन्होंने श्रीकृष्ण और संगीता साहबजी को एक ही दृष्टिकोण से देखा है और देख रहे है। ‘मेरे तो गिरधर गोपाल ‘श्रीकृष्ण प्रेम की कृति के रूप में मानी जाएगी।

Published in: on at 6:36 am Comments (0)

‘बौराया मन

aडा कृष्णशंकर सोनाने व्दारा रचित कविताओं का संग्रह ‘ बौराया मन ‘। डा सोनाने विशेषतः प्रेम के कवि है।मानवीय और सामाजिक संवेदनाओं और सरोकारों का अनूठा संगम ‘बौराया मन ‘ में देखने को मिलेगा।’बौराया मन ‘ को पढ़कर प्रसिद्ध साहित्यकार श्री अक्षय कुमार जैन ने कहा,डा सोनाने वस्तुतः प्रेम के कवि है,उनकी लेखनी में मानवीय संवेदनाओं की भरमार है।ऐसा लगता है,सारा विश्व उनमें समाया हुआ है।

Published in: on at 6:36 am Comments (0)